Saturday, 27 April 2019

Fisherman

एक मछुआरा था। उसे प्रसिद्धि पाने का बड़ा शौक था। उसने एक योजना बनाई।
There sas a Fisherman. It was a fondness for fame.

He made a plan.



From his place of residence, he came in a village far away, where people in the pond had a fear of crocodiles .


                 In that village, he made a big eyebrow that the fish catch no crocodile! The people of the village started giving great fervor to the fisherman's courage! All the stray boys in the village became his devotees !!



                Whichever elderly child woman meets, the fisherman starts reciting her bravery stories. People would be charmed



                The year went on for two or four years. So far no one had seen him catching crocodiles with his eyes. The people of the village now started whispering that it seems that this fish could not even catch ... except for the crocodile!



                 Soon this discussion started happening on every street of the village, every nook.



                The fisherman was waiting for his respect. One day he quietly went to the market and bought from there many bigger traps of strong thread. He fed his spoonful devotees and said, put together a trap in all the ponds of the village, the fisherman in the village is going to live a live show of catching the crocodile.



                  The other day the excited people gathered to see his show. Glory started to cheer around!



He stood on a high mound and addressed the people-



Bro and Sis ...



                   Today I will catch all the crocodiles in the pond together. Because crocodiles run away from a pond to another pond, therefore, we have put together a trap in all the ponds.



He called upon the villagers to see it is a very strong work. The work of villageless is to do. All of you help in trapping in rural areas.



                  People were glad to get caught in the trap. He continued to collect the fish trapped in the trap and collect them. Within two or three days the fish were stacked but not even a crocodile came up.



The patience of the people started to answer now. People would ask when the crocodile ...?

She then stood on a high mound and said-



Bro and Sis...



                  The basic issue is not that I caught the crocodile or caught it. The basic issue is that the crocodile should die or should not be?

Devotee should be, should be, should be, should be.



He said, I have caught all the fish in the pond. Now when the fish will not remain then the crocodile will eat? And when food is not available then he himself will die!



Listening to this, her tambour devotee said,



Wow guru ji ...!

Wow guru ji ... !!

What is the masterstroke struck ...

Nobody thought that!

Fisherman further said-

Bro and Sis ...



                 The collected money will be deposited in the village market by dividing the captured fish at a higher price in the city market. And he sent all the fish to the city.

The general public was disturbed. All the work was done in the work of 'gramhit' except for business. Some people have become addicted to food. Some drowned in the pond in exuberance Now there was no fish in the pond, so their employment was also scraped.



But her devotees were still happy.



There were some sacrifices in the village!



Then one day he picked up a fisherman and went somewhere.



There was no work of villageless, no crocodile caught and no fish was left, therefore the villagers no longer understand what to do, the devotee is so silent



Because Jai cheer, he started only. The villagers are so silent that whatever is done can never be compensated.



🙏🙏🌹🌹🙏🙏


















एक मछुआरा था। उसे प्रसिद्धि पाने का बड़ा शौक था। उसने एक योजना बनाई।

अपने निवास स्थान से सुदूर एक गाँव में आकर रहने लगा, जहाँ के लोगों में तालाब के मगरमच्छो का खौफ था।

                 उस गाँव में उसने अपना बड़ा भौकाल बनाया कि वो मछली नही मगरमच्छ पकड़ता है! गाँव के लोग मछुआरे की हिम्मत की बड़ी दाद देने लगे! गाँव के सारे आवारा लड़के उसके भक्त बन गए!!

                बड़े बुजुर्ग बच्चे औरत जो भी मिलता, मछुआरा उनको अपने बहादुरी के किस्से सुनाना शुरू कर देता। लोग मंत्रमुग्ध हो जाते।

                साल दो चार साल यूँ ही चलता रहा। अब तक किसी ने भी अपनी आँखों से उसे मगरमच्छ पकड़ते न देखा था। गाँव के लोग अब कानाफूसी करने लगे कि लगता है ये मछली भी नही पकड़ पाता... मगरमच्छ की तो बात छोडो!

                 जल्द ही ये चर्चा गाँव की हर गली, हर नुक्कड़ पर होने लगी।

                मछुआरे को अपनी इज़्ज़त की वाट लगती दिखी। एक दिन वो चुपचाप मार्केट गया और वहां से मजबूत धागे वाले कई बड़े बड़े जाल खरीद लाया। अपने चमचे भक्तो को उसने खिलाया पिलाया और कहा जाओ गाँव के सभी तालाबों में एक साथ जाल डालो, गाँव में डुगडुगी पिटवा दो की मछुआरा मगरमच्छ पकड़ने का लाइव शो करने वाला है।

                  दूसरे दिन उत्साहित लोग उसका शो देखने इकठ्ठा हो गए। चारो तरफ जय जयकार होने लगी!

एक ऊँचे टीले पर खड़े होकर उसने लोगों को संबोधित किया-

बाइयों और बेनो... 

                   आज मैं तालाब के सारे मगरमच्छों को एक साथ पकडूँगा। चूँकि मगरमच्छ एक तालाब से दूसरे तालाब में भाग जाता है इसलिए सभी तालाबों में एक साथ जाल डलवाया हूँ।

उसने ग्रामवासियों से आह्वान किया देखिये ये अतिपुनीत कार्य है। ग्रामहित का कार्य है। आप सभी लोग ग्रामहित में जाल खिंचवाने में मदद कीजिये।

                  लोग खुशी-खुशी जाल खींचने में जुट गए। वो जाल में फंसी मछलियों को निकलवाकर इकठ्ठा करवाता रहा। दो तीन दिन में ही मछलियों का ढेर लग गया पर एक भी मगरमच्छ पकड़ न आया।

लोगों का सब्र अब जबाब देने लगा था। लोग पूछने लगे कब पकड़ोगे मगरमच्छ...?
वो फिर ऊँचे वाले टीले पर खड़ा हुआ और बोला-

बाइयों और बेनो... 

                  मूल मुद्दा ये नही कि मैंने मगरमच्छ पकड़ा या नही पकड़ा। मूल मुद्दा ये है कि मगरमच्छ की मौत होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए??
भक्तगण- होनी चाहिए, होनी चाहिए, होनी चाहिए।

वो बोला देखो, मैंने तालाब की सारी मछलियां पकड़वा ली है। अब जब मछली ही नही रहेगी तो मगरमच्छ खायेगा क्या? और जब खाने को नही मिलेगा तो वो खुद ही मर जायेगा!

ये बात सुनकर उसके चमचे भक्त जयजयकार करते बोले-

वाह गुरु जी...!
वाह गुरु जी...!!
क्या मास्टरस्ट्रोक मारा है...
ऐसा तो किसी ने सोचा ही नही था!

Read more .......

https://crazy-guru.anxietyattak.com/2019/04/fisherman.html

मछुआरा आगे बोला-

बाइयों और बेनो ...

                 ये पकड़ी हुयी मछलियां को शहर की मार्केट में ऊँचे दाम पर बेंचकर प्राप्त धन को ग्रामहित में लगा दिया जायेगा। और उसने सब मछलियां शहर भिजवा दी।
उधर आम जनता परेशान थी। सब काम धंधा छोड़कर 'ग्रामहित' के कार्य में लगी थी। कुछ के घर खाने के लाले पड़ गए। कुछ अतिउत्साह में तालाब में डूब गए।

अब तालाब में मछलिया भी न थी, सो उनका रोजगार भी छिन गया।

लेकिन उसके भक्त अब भी खुश थे।

कह रहे थे अब ग्रामहित में कुछ बलिदान तो करना ही होगा!

फिर एक एकदिन वो मछुवारा झोला उठाकर कहीं चल दिया।

न ग्रामहित का कोई काम हुआ, न मगरमच्छ पकड़े गए और न मछलियां बाकि बची थी इसलिए ग्रामवासियों को अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करें,
भक्त इसलिए चुप है 

क्योंकि जय जयकार तो उन्होंने ही शुरू कि थी। ग्रामवासी इसलिए चुप हैं कि जो हो गया उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती है। 

🙏🙏🌹🌹🙏🙏

#JetAirways से बेरोजगार हुए 20 हज़ार कर्मचारी अपने नाम के आगे चौकीदार लगा लें।






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