Saturday, 6 July 2019

Must be read by taking 2 minutes 🙏🏻🙏🏻

एक मुल्ले का खून
(कहानी)....
    (2मिनट निकाल कर अवश्य पढ़ें)🙏🏻🙏🏻

https://crazy-guru.anxietyattak.com/2019/07/must-be-read-by-taking-2-minutes.html

(story)....

    (Must be read by taking 2 minutes) 🙏🏻🙏🏻





Pramod Babu had already received the news of Tamasha.

Regularly wiping sweat of face was coming home with sharp steps, where light was washed in the wash basin which was bathed with light.


"What do you think ... the blood stains are so easily removed from the hands?"

 They were able to say so much in the shuddering tone.



The son saw a staring, but did not even feel the need to speak.



"I ask, what was the hostility you had from Afzal?"

Which thou hast slain Jai Shri Ram and Jay Hanuman slaying them in the end?

Speaking of this, Pramod spent the last year's father.



"She eats goat." The son responded with a jarring



"So ... even if there is a ... Someone said and you believed ... became a crowd and beat up a single person."



"Yes ... done and whoever will touch Goumaata, I will defeat this." This time, the son gave an eye to the father.



"You did not give birth to any cow, son, my wife and your mother gave it to you, who had come under the wheels of a drunken nobleman who was drunk, and you would never have felt resentment inside you."



"We are Hindus, Baba and cow are ours." The angry boy wanted to get away from the front, but the father caught his hand.



What kind of faith ... do you know who have poisoned your mind?

Ask the people of their own party when they promise to get beef in Goa, from Kerala to all the states of the northeast, where does this faith go to die? "



"I do not know all, Baba, I do not come to politics ... I just know that the cow is our mother and this neck bites her."



"So much of your blood became so bloody that by kicking your future you became a killer.

Well not tell

 When hundreds of cows died in Gaushala in Rajasthan, why did not you bleed? ...

When Dr. Mishra killed Baha'i in mass grave to make a medicine in his farmhouse, why did not you bleed?



This time there is no answer to light. Just try to get rid of it.



"Why do not you say that you do not believe in cow ... you hate the Muslims in your heart."



"Yes, I hate hatred, unimaginable hatred. If I just walk out of the country, drive them out."



"Why is hate ... why?"



Hundreds of abuses have come to her lips.



"I know ... this garbage is being filled in the mind of you people, all know what you did when you left or what the Mughals did ... What did the Kashmiris do ... Afzal, Kasab, What did Memon do?

Tell me, what did a Muslim do with your father-in-law, what did you do with someone in your family ... tell me an example. "



Now she did not know anything and she jumped out of the house by jumping the father's hand. Both the sisters standing in the verandah kept watching for fear.



There was a time of mobile Obviously the video of this incident was to be viral ... in such a way it was not difficult to identify the accused. If the whole country is to be discussed, then the police will have to take action.

The unidentified crowd escaped but all those who ran the knife were caught.



And there was light in them too.

Despite lakhs of attempts, Pramod could not save the son from the clutches of law.



The year passed slowly as the prisoner in question. Meanwhile, the son of the weakened father used to meet.



Today he came to meet the son ... The pit lying around the eyes of the son and the unexplained body was telling how the day was passing in jail.



"Happy son ... Today, your sister's relationship with you is broken.

 They said that they will not marry a murderer's sister. The truth is that they know that in the court case of Kachheri we can not get married as well.



The light of the light was overwhelmed by an invisible burden, but it was not possible to speak.



"And you know, who was a guru, you people, Mithun babu ...

Four other people were disposed of by cow's excuse. In the bye election, a ticket was received from the party's side and the public won the elections if it is good in faith instead of the stomach. May be a minister too.

 He had only one son ... anywhere in Dehradun. After winning the election, sent to London to read ... now there will be a great career of reading. "



The head of light leaned ... he started trying to stop his tears.



"Son, ours too was one. The people of the big people, the leaders understand everything ... never spoiling their lives by crowding.

He is our son who does not know who, when he has fallen on his shoulders, crushed Armaan and his family's career.



Prakash turned back to his father, so that he could not see his tears. His voice from behind was again in his ears ...



"Mithun Babu is going to Kerala tomorrow in a party meeting.

 Thakur ... If the meat is only a fish bird account, then maybe join the beef party with them to fill the voters there.

What is the faith ...

 Then Ganga will take bath and restored. "



Then there was silence ...

But this silent was now part of his life.




एक मुल्ले का खून
(कहानी)....
    (2मिनट निकाल कर अवश्य पढ़ें)🙏🏻🙏🏻


प्रमोद बाबू को तमाशे की खबर पहले ही मिल चुकी थी। बार-बार चेहरे का पसीना पोंछते तेज कदमों से घर पंहुचे थे, जहां प्रकाश पसीने से नहाया वाश बेसिन में हाथ धोता मिला था।

"क्या लगता है बेटा... खून के दाग हाथों से इतनी आसानी से छूट जाते हैं?"
 थरथराते स्वर में इतना ही कह पाये थे।

बेटे ने घूर के देखा था, लेकिन बोलने की जरूरत फिर भी न महसूस की।

"मैं पूछता हूँ कि क्या दुश्मनी थी तेरी अफजल से?"
जो तूने उसे जय श्री राम और जय हनुमान का नारा लगवाते हुये अंत में मार डाला?
यह बोलते हुये प्रमोद आखिर बरस ही पड़े उसके पिता।

"वह गौमांस खाता है।" बेटे ने झुंझला कर जवाब दिया था।

"तो... खाता भी है तो? किसी ने कहा और तूने मान लिया... भीड़ बन कर एक अकेले इंसान को पीट-पीट कर खत्म कर डाला।"

"हाँ... कर डाला और जो भी गौमाता को हाथ लगायेगा, उसका यही हश्र करूँगा।" बेटे ने आंखें चढ़ाते हुए इस बार बाप से आंख मिलाई थी।

"तुझे किसी गाय ने जन्म नहीं दिया था बेटा, मेरी पत्नी और तेरी माँ ने दिया था,! जो नशे में लहराते एक मदहोश रईसजादे की गाड़ी के नीचे आ गयी थी। कभी एसा आक्रोश तब तो न पनपा तेरे अंदर।"

"हम हिंदू हैं बाबा और गाय हमारी आस्था है।" झुंझलाया हुआ बेटा सामने से हट जाना चाहता था, लेकिन बाप ने हाथ पकड़ लिया।

कैसी आस्था... जानता हूँ किन लोगों ने तेरे दिमाग में जहर भरा है।
पूछ तो उनसे कि उनकी ही पार्टी के लोग जब गोवा, केरला से लेकर पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में जब बीफ दिलाने का वादा करते हैं तब यह आस्था कहां मरने चली जाती है।"

"मैं सब नहीं जानता बाबा, मुझे राजनीति नहीं आती... मुझे बस इतना पता है कि गाय हमारी माँ है और यह मुल्ले उसे काटते हैं।"

"तो तेरा इतना खून खौल गया कि अपने भविष्य को लात मार कर तू हत्यारा बन गया।
अच्छा बता न...
 जब राजस्थान में सैकड़ों गायें गौशाला में मरीं, तब तेरा खून क्यों नहीं खौला?...
जब बहराईच में डाक्टर मिश्रा ने अपने फार्म हाऊस में दवा बनाने के लिये ढेरों गायें मार डालीं, तब तेरा खून क्यों नहीं खौला?"

प्रकाश को इस बार कोई जवाब तो नहीं सूझा। बस हाथ छुड़ाने की कोशिश ही की।

"सीधे क्यों नहीं कहता कि तुझे गाय में आस्था नहीं... तेरे मन में मुसलमानों के लिये नफरत है।"

"हाँ है मुझे मुल्लों से नफरत, बेपनाह नफरत। मेरा बस चले तो देश से बाहर खदेड़ दूं गद्दारों को।"

"क्यों है नफरत... क्यों?"

सैकड़ों गालियां उसके होठों तक आकर रह गयीं।

"जानता हूँ... यह जो कचरा तुम लोगों के दिमाग में भरा जा रहा है। सब पता है। तू छोड़ न कब किसने क्या किया या मुगलों ने क्या किया था... कश्मीरियों ने क्या किया... अफजल, कसाब, मेमन ने क्या किया।
यह बता तेरे साथ, तेरे बाप दादा के साथ किसी मुसलमान ने क्या बुरा किया... किसने तेरा, तेरे खानदान में किसी के साथ क्या बुरा किया... कोई एक उदाहरण तो बता।"

अब उसे कुछ न सूझा और वह जोर से बाप का हाथ झटक कर घर से बाहर निकल गया। बरामदे में खड़ी दोनों बहनें डरी सहमी देखती रह गयीं।

मोबाईल का जमाना था। जाहिर है इस घटना के वीडियो वायरल होने ही थे... ऐसे में आरोपी पहचाने जाने मुश्किल नहीं थे। पूरे देश में चर्चा होगी तो पुलिस को एक्शन तो लेना ही पड़ेगा।
अनजान भीड़ तो बच गयी मगर चाकू चलाने वाले चारों पकड़े गये।

और उनमें प्रकाश भी था।
लाख कोशिश के बाद भी प्रमोद बेटे को कानून के शिकंजे से बचा नहीं सके।

विचाराधीन कैदी के रूप में ही धीरे-धीरे साल गुजर गया। इस बीच कमजोर पड़ चुके बाप का बेटे से मिलना होता रहता था।

आज फिर वह मिलने आये थे बेटे से... बेटे की आंखों के गिर्द पड़े गड्ढे और इकहरी हो चुकी काया बता रही थी कि जेल में कैसे दिन गुजर रहे थे।

"मुबारक हो बेटा... आज फाइनली तेरी बहन का रिश्ता भी टूट गया।
 वह लोग बोल गये कि एक हत्यारे की बहन से शादी नहीं करेंगे। सच तो यह है कि उन्हें पता है कि कोर्ट कचेहरी के चक्कर में हम इस लायक भी नहीं बचे कि ढंग से शादी कर सकें।"

प्रकाश का सीना एक अदृश्य से बोझ से दब गया, पर बोल न छूट सके।

"और पता है, जो गुरू थे तुम लोगों के, मिट्ठू बाबू...
गाय के बहाने चार और लोग निपटाये थे वह। तो उपचुनाव में पार्टी की तरफ से ईनाम में टिकट मिला था और जनता तो पेट के बजाय अब आस्था में ही मस्त है तो चुनाव जीत भी लिये। हो सकता है कि मंत्री भी बन जायें।
 उनका एक ही बेटा था... कहीं देहरादून में पढ़ता था। चुनाव जीतते ही लंदन भेज दिये पढ़ने को... अब वहां पढ़ लिख के शानदार कैरियर बनायेगा।"

प्रकाश का सर झुक गया... वह अपने आंसू रोकने की कोशिश करने लगा।

"बेटा हमारा भी एक था। बड़े लोगों, नेताओं के बेटे सब समझते हैं... कभी भीड़ बनके अपनी जिंदगी नहीं खराब करते।
वह तो हमारे बेटे होते हैं जो जान ही नहीं पाते कि कब कौन उनके कंधों पर पांव रख कर, उनके और उनके परिवारों के अरमान कुचलते हुए अपना कैरियर बना गया।"

प्रकाश ने मुड़ कर पिता की तरफ पीठ कर ली, ताकि वे उसके आंसू न देख सकें। पीछे से उनकी आवाज उसके कानों में फिर पड़ी थी...

"मिट्ठू बाबू एक पार्टी मीटिंग में कल केरला जा रहे हैं।
 ठाकुर हैं... मांस मच्छी खाते ही हैं तो हो सकता है कि वहां वोटरों को भरमाने के लिये उनके साथ बीफ पार्टी में भी शामिल हो लें।
आस्था का क्या है...
 फिर गंगा नहा कर बहाल कर लेंगे।"

फिर सन्नाटा छा गया.....

पर यह सन्नाटा तो अब उसकी जिंदगी का हिस्सा था।












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