Friday 14 August 2020

New Gen X should learn from the mistake made by Sushant

सुशांत से जो गलती हुई उससे सबक ले नयी पीढ़ी...
New Gen X  should learn from the mistake made by Sushant ...
Sushant Singh Rajput's mysterious suspicious death is also a lesson.
For the present-day youth generation, especially for the present young generation, which touches special heights of wealth success and respect.
These days I am shocked to hear that news of Sushant's sisters, even his 74-year-old father, could not speak to Sushant for many months.
Riya Chakraborty's role in it is being exposed. But the basic element of my post is that ... why did this situation arise around Sushant ...
My opinion about this is somewhat different from the kind of discussions happening these days which I am sharing.
If you understand the first three facts, then the matter will be fully understood.
The new generation may be unknown, but my generation and the generation before me know that Sushant did not touch even five percent of the heights of wealth and fame in this film world, compared to the heights which Rajesh Khanna, Amitabh Bachchan and Dharmendra had touched. was.
But you will be pleasantly surprised to know that the trio of Rajesh Khanna, Amitabh Bachchan and Dharmendra were continuously crossing new heights of wealth and fame at the peak of their film career. At that time, their parents did not live separately from them. Dharmendra used to keep his parents with a rural background in Mumbai. In the same year, at the age of 83, Dharmendra, while remembering his mother, tweeted his memories with his photo and said that as long as his mother was alive, he used to book the account of money at home. I used to keep on spending extravagantly.
It was famous for Dharmendra at that time that anyone from his village was free to come to Mumbai and live in his house.
The same situation was with Rajesh Khanna. The father had died and his mother lived with him. It is not that Rajesh Khanna's mother was helpless. Very few people will know that Rajesh Khanna was an adopted child and his adoptive parents were millionaires in the 60s. So mother was not dependent on Rajesh Khanna but till the last time she stayed with Rajesh Khanna in her house.
Last example of Amitabh Bachchan. The whole world knows that till the last time his father Harivansh Rai Bachchan and his mother, Teji Bachchan lived with him in his house. Bachchan ji died in 2003 at the age of 96 and Teji ji died in 2007 at the age of 93. These dates indicate that Amitabh Bachchan's unprecedented popularity and his parents were with him throughout the period of stardom.
Now to the point. It is not that the three superstars of Hindi films mentioned above have less fun in that period. Film magazines used to be awash with stories of his colorful lifestyle. Terrible storms came in the lives of these film stars. But no one was killed like Sushant or anything like that. These stars were overcome with those storms and continued to shine.

Rajesh Khanna is no more, but Dharmendra and Amitabh Bachchan are still living a luxurious life.

In fact, the center of mental, ideological and internal energy of a person is his home and parents are the main sources of that energy.

No matter how severe a crisis or problem, they stand with you like a rock and do not let your morale break. Even after criticizing your shortcomings, the way in which they accept it, they assimilate. No other person can do that way.

In the presence of mother and father, rivals like Riya can be successful in hovering around you outside the house, but remain far away from the frame of your house.

Mother and father saw you with your birth, tested and understood. Your wife / husband and your children do not get this opportunity. There may be some exceptions.

But the same happens in 99% of cases.

There is a very wide subject, a book can be written.

on this

But today we discussed this subject very briefly because I believe that if his old father had been living with Sushant, then there are as many strange episodes coming out today, which happened due to his death, one of them is Sushant. Does not happen in life.

Remember that only your mother and your father have the courage and courage to get rid of that drug when the addiction to wealth and fame starts climbing on your head.

सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी संदेहास्पद मौत एक सबक भी है।

आजकल की नौजवान पीढ़ी के लिए विशेषकर सम्पत्ति सफ़लता और सम्मान की विशेष ऊंचाईयों को छूने वाली वर्तमान नौजवान पीढ़ी के लिए.

इन दिनों यह खबरें देख सुन कर मैं हतप्रभ हूं कि सुशांत की बहनें, यहां तक कि उसके 74 वर्षीय वृद्ध पिता तक सुशांत से कई कई महीने तक बात नहीं कर पाते थे.

रिया चक्रवर्ती की इसमें जो भूमिका थी वह उजागर हो रही है. लेकिन मेरी पोस्ट का मूल तत्व यह है कि... सुशांत के इर्द-गिर्द यह स्थितियां बनी क्यों...

इस बारे में मेरा मत इनदिनों हो रहीं भांति भांति की चर्चाओं से कुछ अलग है जिसे मैं साझा कर रहा हूं.

पहले तीन तथ्य समझ लीजिए तो बात पूरी तरह समझ में आयेगी.

नयी पीढ़ी भले अनजान हो लेकिन मेरी पीढ़ी और मुझसे पहले वाली पीढ़ी जानती है कि  इसी फिल्मी दुनिया में दौलत और शोहरत की जिन ऊंचाइयों को राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन और धर्मेन्द्र ने छुआ था उन ऊंचाइयों की तुलना में पांच प्रतिशत ऊंचाई भी सुशांत ने नहीं छुई थी.

लेकिन आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन और धर्मेन्द्र की तिकड़ी अपने फिल्मी कैरियर के चरम पर जब दौलत और शोहरत की नयी ऊंचाइयों को लगातार पार करती जा रही थी। उस समय इनके माता पिता इनसे अलग नहीं रहते थे. ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले अपने माता पिता को धर्मेन्द्र मुम्बई में अपने साथ रखते थे. इसी वर्ष 83 वर्ष की आयु में धर्मेन्द्र ने अपनी माताश्री को याद करते हुए उनकी फोटो के साथ उनकी यादों को ट्वीट करते हुए यह बताया था कि जब तक मां जीवित रहीं तब तक घर पर पैसों का हिसाब किताब वो ही करती थीं. मेरी फिजूलखर्ची पर टोकती भी रहती थीं. 

धर्मेन्द्र के लिए तो उस जमाने में मशहूर था कि उनके गांव का कोई भी व्यक्ति मुम्बई आकर उनके घर में रहने के लिए स्वतंत्र था.

यही स्थिति राजेश खन्ना की थी. पिता का देहान्त हो चुका था और उनकी मां उनके साथ ही रहती थीं. ऐसा नहीं है कि राजेश खन्ना की मां असहाय थीं. बहुत कम लोगों को यह ज्ञात होगा कि राजेश खन्ना गोद ली हुई सन्तान थे और उन्हें गोद लेनेवाले माता पिता 60 के दशक में करोड़पति थे. इसलिए मां राजेश खन्ना पर आश्रित नहीं थीं किन्तु अन्तिम समय तक वो राजेश खन्ना के साथ उनके घर में ही रहीं.

अन्तिम उदाहरण अमिताभ बच्चन का. सारी दुनिया जानती है कि अन्तिम समय तक उनके पिता हरिवंश राय बच्चन और उनकी माताश्री तेजी बच्चन उनके साथ उनके घर में ही रहते थे. बच्चन जी का देहान्त 96 वर्ष की आयु में 2003 में तथा तेजी जी का देहान्त 93 वर्ष की आयु में 2007 में हुआ. यह तिथियां बताती हैं कि अमिताभ बच्चन की अभूतपूर्व लोकप्रियता और स्टारडम के पूरे दौर में उनके माता पिता उनके साथ ही थे.

अब बात मुद्दे की. ऐसा नहीं है कि हिन्दी फ़िल्मों के जिन तीन सुपर स्टारों का ऊपर जिक्र किया है, उन्होंने अपने उस दौर में कम मौज मस्ती की. उनकी रंगीन जीवनशैली के गुलछर्रे के किस्सों से तब की फिल्मी पत्रिकाएं पटी रहती थीं. इन फिल्मी सितारों के जीवन में भयानक झंझावात भी आए. लेकिन किसी का भी हश्र सुशांत या उस जैसे कुछ और लोगों की तरह नहीं हुआ. यह सितारे उन झंझावातों से धमक के साथ उबरते रहे और चमकते रहे.

राजेश खन्ना,  तो नहीं रहे लेकिन धर्मेन्द्र और अमिताभ बच्चन आज भी एक आलीशान जिंदगी जी रहे हैं.

दरअसल व्यक्ति की मानसिक वैचारिक और आंतरिक ऊर्जा का केन्द्र उसका घर होता है तथा माता पिता उस ऊर्जा के मुख्य स्त्रोत होते हैं.

कितना भी भीषण संकट या समस्या क्यों ना हो वो चट्टान की तरह आपके साथ खड़े होते हैं और आपका मनोबल नहीं टूटने देते हैं. आपकी कमियों गलतियों की आलोचना करते हुए भी वो जिस तरह, जिस शैली में उसे स्वीकार लेते हैं, आत्मसात कर लेते हैं. उस तरह से कोई दूसरा व्यक्ति कर ही नहीं सकता.

मां और पिता की उपस्थिति में रिया सरीखी बलाएं घर के बाहर आपके आसपास मंडराने में तो सफल हो सकती हैं लेकिन आपके घर की चौखट से कोसों दूर रहती हैं.

मां और पिता ने आपको आपके जन्म के साथ ही देखा जांचा परखा और समझा होता है. यह अवसर आपकी पत्नी/पति और आपकी सन्तान को नहीं मिलता. कुछ अपवाद हो सकते हैं।

लेकिन 99% मामलों में ऐसा ही होता है।

बहुत विस्तृत विषय है, एक पुस्तक लिखी जा सकती है।

इस पर

लेकिन आज बहुत संक्षेप में इस विषय की चर्चा इसलिए की क्योंकि मेरा मानना है कि सुशांत के साथ यदि उसके वृद्ध पिता रह रहे होते तो जितने अजीबोगरीब प्रकरण आज सामने आ रहे हैं, जो उसकी मृत्यु के कारण भी बने, उनमें से एक भी प्रकरण सुशांत के जीवन में नहीं घटता.

याद रखिए कि जब दौलत और शोहरत का नशा आपके सिर पर चढ़ना शुरू होता है तो उस नशे को उतारने की हिम्मत और हौसला सिर्फ आपकी मां और आपके पिता के पास होता है।


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