Thursday, 10 September 2020

From September 21, 2020 the government has issued conditional permission to open Schools

गृह मंत्री अमित शाह से माँग
Demand from Home Minister Amit Shah

In the global pandemic Covid-19 (Corona period), when millions of people are dying every day, they are dying, India has reached second place in the corona affected countries after America in the countries of the world, in this state of uncontrolled hospitals. There is also no place to recruit patients, meanwhile, from September 21, the government has issued conditional permission to open the school, the condition is that the children will go to school only with the written permission of the parents. After taking such permission / consent in hospitals, the doctors do not try to avoid the guarantee of the patient being cured? Or do not use such consent for their defense? The question is arising, why are children not allowed to do other work including driving with the permission of parents? Why fees and courses are not decided with the permission of parents? Written permission to send children to school, from parents (by filling forms), if the corona of the children is affected, the parents will not be blamed for the fees and results?
Open up markets, do not follow the guide line, how will the limited size rooms be?
Is the government's guideline being followed in the open markets? Does the school have such large rooms in which more than three students sit on a bench, keeping a fixed distance between them, how will a teacher teach all the students? Will cleaning and others be followed? Who will see all this and how?
How will school vehicles be followed?
It is well-known how the children are brought to school and left in vehicles by thwarting all efforts of police and administration.
Children will come from every region
Children from every region, including Corona affected, will come to school, if children in some areas are stopped or do not come to school, then how will children be provided uniform education? Opening a school without knowing or thinking about these points is like pushing children to death, because there is no place in hospitals! What action will be taken against the children of law if the rules are broken? Will parents not be convicted? Or, like signing the consent of the family in hospitals, the parents will be blamed for writing the parents' permission?
Important talk
The operation of schools should not be allowed in elective, voluntary and any kind of situations in catastrophic conditions ...
When the big and sensible students of the college went for the final year exams, then it was a huge irresponsible decision to leave the children of easygoing age in school as they believed. How will children be able to keep track of the distance in the vehicles to and from school? There is not even enough space and arrangement for tiffin to eat and drink water, so that children can follow the instructions by prescribed distance, continuous sanitizer, more sanitizer can also have serious adverse effects on children, it is impossible to monitor and control every child. Is the parents responsible for this will be held? Thousands of students are taught in schools like Sikka, Gujarati, Jasmine Devi, Choitharam, Digambar, DPS, Shishukunj, St. Refiel, Eminent, Enrold. The country has come in second place in the world due to the increasing number of patients of Corona and the number of patients is increasing continuously, arrangements are not being made for every affected to get treatment, one day at a cremation ground each day. Creations for cremation of 31 to 40 dead bodies are not being made, in such dreadful conditions, the operation of schools should not be allowed as voluntary, voluntary and by any means ...



वैश्विक महामारी कोविड-19 (कोरोना काल) में जब लाखों लोग रोज इससे प्रभावित हो रहे है, मर रहे है, दुनिया के देशों में अमेरिका के बाद भारत कोरोना प्रभावित देशों में दूसरे नंबर पर पहुँच गया है, अनियंत्रण की इस स्थिति में अस्पतालों में मरीज़ों को भर्ती करने की जगह भी नही है, इस बीच 21 सितंबर से सरकार ने स्कूल खोलने की सशर्त अनुमति जारी की है, शर्त यह है बच्चें पेरेंट्स की लिखित अनुमति से ही स्कूल जाएँगे। क्या इस प्रकार की अनुमति/सहमति अस्पतालों में लेने के बाद डॉक्टर मरीज के ठीक हो जाने की ग्यारंटी से बचने का प्रयास नही करते है ? या ऐसी सहमति का अपने बचाव के लिए उपयोग नही करते है ? सवाल यह उठ रहा है पेरेंट्स की अनुमति से बच्चों को गाड़ी चलाने सहित अन्य काम करने की छूट क्यों नही दी जाती ? पेरेंट्स की अनुमति से फीस और कोर्स का निर्धारण क्यों नही किया जाता ? बच्चों को स्कूल भेजने की लिखित अनुमति पेरेंट्स से लेकर (फ़ार्म भरवा कर) बच्चों के कोरोना प्रभावित होने पर, फीस और रिजल्ट के लिए पेरेंट्स को दोषी नही ठहराया जाएगा ?

खुलें बाजारों में गाईड लाईन का पालन नही सीमित साईज के कमरों में कैसे होगा ?

क्या सरकार की गाईड लाईन का पालन खुले बाजारों में हो रहा है ? क्या स्कूल में इतने बड़े रूम बने है, जिनमें एक बेंच पर तीन से अधिक छात्र बैठते हो, उनमें निर्धारित दूरी रख कर, एक शिक्षक सभी छात्रों को कैसे पढ़ाएँगे ? सफ़ाई और अन्य का पालन हो पाएगा ? ये सब कौन और कैसे देखेगा ?

स्कूल वाहनों मे कैसे होगा पालन ?

पुलिस और प्रशासन के तमाम प्रयासों को विफल करके बच्चों को स्कूल लाने-छोड़ने वाले वाहनों में किस तरह से बच्चों को भर कर लाया जाता है यह जगजाहिर है।

हर क्षेत्र से बच्चें आएँगे

कोरोना प्रभावित सहित हर क्षेत्र से बच्चें स्कूल आएँगे, अगर कुछ क्षेत्रों के बच्चों को रोका गया या स्कूल नही आए तो बच्चों को एक समान पढ़ाई कैसे करवाई जाएगी ? इन बिंदुओं पर जानकारी लिए बिना या सोचें बिना स्कूल खोलना बच्चों को मौत के मुँह में धकेलने जैसा है, क्योंकि अस्पतालों में जगह नही है ! नियम टूटने पर क़ानूनन बच्चों पर क्या कार्यवाही की जाएगी ? क्या पेरेंट्स को दोषी नही ठहरा दिया जाएगा ? या अस्पतालों में परिवार की सहमति पर हस्ताक्षर की तरह,पेरेंट्स की अनुमति लिखवा कर पूरा दोष पेरेंट्स पर मढ़ दिया जाएगा ?

खास बात

भयावह बनती स्थितियों में एच्छिक, सवेच्छिक और किसी भी प्रकार से स्कूलों के संचालन की अनुमति नही दी जाना चाहिए ...

जब कालेज के बड़े और समझदार छात्र फ़ायनल ईयर की परीक्षा देने गए तो भीड़ में जुट गए ऐसे में स्कूल में अल्हड़ उम्र के बच्चों को उनके भरोसे ही छोड़ देना बड़ी गैरजिम्मेदारी पूर्ण निर्णय है । बच्चों को स्कूल आने-जाने के वाहनों में दूरी का कैसे ध्यान रख पाएँगे ? टिफिन खाने और पानी पीने के लिए भी इतनी पर्याप्त स्थान और व्यवस्था नही है कि निर्धारित दूरी, लगातार सेनिटाईजर करके निर्देशों का पालन बच्चें कर सके, अधिक सेनिटाईजर से भी बच्चों पर गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, हर बच्चे पर नजर और नियंत्रण रखना असंभव है , इसके लिए दोषी पालकों को ठहरा दिया जाएगा ? सिक्का, गुजराती, चमेली देवी, चोईथराम, दिगम्बर, डीपीएस, शिशुकुंज, सेंट रेफियल, एमिनेंट, एनरोल्ड जैसे स्कूलों में हजारों छात्र - छात्राएँ पढ़ते है । कोरोना के बढ़ते मरीज़ों की संख्या में देश दुनिया में दूसरे नंबर पर आ चुका है और लगातार भारी संख्या में मरीज बढ़ रहे है, हर प्रभावित को ईलाज मिल सके इसकी व्यवस्थाएँ नही बन पा रही है, एक-एक शमशान घाट पर एक - एक दिन में 31 से 40 शवों का दाह संस्कार करने की व्यवस्थाएँ नही बन पा रही है, ऐसी भयावह बनती स्थितियों में एच्छिक, सवेच्छिक और किसी भी प्रकार से स्कूलों के संचालन की अनुमति नही दी जाना चाहिए ...


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